पटियाला- “आज के आधुनिक और इंटरनेट युग में बहावलपुरी संस्कृति और भाषा के संरक्षण के लिए ठोस और व्यावहारिक कदम उठाने की सख्त जरूरत है, क्योंकि किसी भी कौम या समाज की असली पहचान उसकी मातृभाषा और संस्कृति में होती है।” इन विचारों को भाषा विभाग के पूर्व निदेशक, प्रसिद्ध लेखक और बहावलपुर समाज की महान शख्सियत डॉ. मदन लाल हसीजा ने व्यक्त किया। वह एस.के. तनेजा के नेतृत्व में अंतरराष्ट्रीय बहावलपुर विरासत मंच (एबीवीएम) की ओर से भाषा भवन, पटियाला में करवाए गए विशेष सेमिनार के दौरान अपना मुख्य भाषण दे रहे थे।
डॉ. हसीजा ने जोर देते हुए कहा कि आज देश-विदेश में रहने वाली नई पीढ़ी अपनी विरासत की जड़ों से दूर होती जा रही है। यदि बहावलपुर की भाषा और संस्कृति का लिखित, साहित्यिक और डिजिटल दस्तावेजीकरण नहीं किया गया, तो आने वाली पीढ़ियां अपनी ऐतिहासिक पहचान से वंचित रह जाएंगी।
जिला योजना बोर्ड के चेयरमैन और बहावलपुर समाज की शख्सियत तेजिंदर मेहता ने कहा कि “विरासत केवल अतीत की कोई निशानी नहीं होती, बल्कि यह हमारे वर्तमान की आत्मा और भविष्य की मार्गदर्शक होती है। जो कौमें अपनी मातृभाषा और सांस्कृतिक विरासत को संभालकर रखती हैं, वे समय के बदलाव के बीच भी अपनी पहचान और स्वाभिमान बनाए रखती हैं।” बहावलपुरी मातृभाषा और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को बचाने के लिए एबीवीएम की ओर से किए जा रहे प्रयासों की सराहना करते हुए उन्होंने विश्वास दिलाया कि वह बहावलपुरी भाषा, साहित्य और संस्कृति के संरक्षण तथा प्रचार-प्रसार के लिए सरकारी और सामाजिक स्तर पर हर संभव सहयोग देंगे।
सेमिनार के दौरान भारतीय बहावलपुर महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुशील कुमार पोपली महाराष्ट्र से विशेष रूप से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से कार्यक्रम से जुड़े। एबीवीएम की पूरी टीम को शुभकामनाएं देते हुए श्री पोपली ने कहा कि “बहावलपुर समाज के हितों, भाषा और संस्कृति की उन्नति के लिए किए जाने वाले हर कार्य में पूरे बहावलपुर समुदाय को एकजुट होकर आगे आना चाहिए। एकता ही हमारी असली ताकत है।”
सेमिनार के दौरान प्रसिद्ध भाषा विशेषज्ञ और पंजाबी विकिमीडियन चरण गिल ने आधुनिक तकनीक के महत्व पर जोर देते हुए कहा, “डिजिटल युग में विकिपीडिया जैसे अंतरराष्ट्रीय इंटरनेट प्लेटफॉर्म पर बहावलपुरी भाषा, शब्दकोश और इसके समृद्ध इतिहास को स्थायी रूप से सुरक्षित रखना समय की मुख्य मांग है।” उन्होंने बहावलपुरी बोली के ऑनलाइन दस्तावेजीकरण और इसे डिजिटल दुनिया के अनुरूप बनाने के लिए स्वेच्छा से अपनी तकनीकी और भाषाई सेवाएं देने का वचन भी दिया।
इसके अलावा पंजाब स्टेट इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन के वरिष्ठ वाइस चेयरमैन प्रवीण छाबड़ा, भारतीय बहावलपुर महासंघ के वरिष्ठ उपाध्यक्ष श्याम सुंदर वधवा, पंजाब अध्यक्ष राज कुमार सचदेवा, सचिव सुनील किंगर, प्रदेश युवा अध्यक्ष कृष्ण सिंधी, कार्यकारिणी सदस्य विजय छाबड़ा और मदन राणा, जगदीश आहूजा, दिनेश चावला, रमेश मास्टर, राजिंदर सचदेवा, राधा कृष्ण अनेजा, सतीश अनेजा, राज कुमार छाबड़ा, प्रवीण मदान, एमसी दिनेश मेहता, एमसी मोहित कुकरेजा, पुरुषोत्तम किंगर, पंचायत प्रमुख सुरेश भटेजा राजपुरा, सदस्य शाम लाल, दर्शन वधवा, हंसराज, बहावलपुर महासंघ यूथ विंग समाना के एडवोकेट दविंदर हसीजा, दविंदर जैसिंह और संजय मंत्री, राहुल सेठी, सुमित टकेजा, गौरव छाबड़ा तथा बहावलपुर समाज की अन्य प्रमुख शख्सियतों, विद्वानों, भाषा विशेषज्ञों, बुद्धिजीवियों और साहित्यकारों ने विशेष रूप से भाग लिया और अपने विचार साझा किए।
पब्लिक कॉलेज समाना के प्रोफेसर अश्वनी कुमार मदान ने मंच संचालन की जिम्मेदारी बखूबी निभाई। कार्यक्रम के अंत में मंच के संयोजक सुरिंदर कुमार तनेजा ने सभी मेहमानों का धन्यवाद करते हुए कहा कि एबीवीएम हर तरह के राजनीतिक, वैचारिक और सामाजिक मतभेदों से ऊपर उठकर बहावलपुर विरासत के संरक्षण के लिए लगातार काम करेगा।
