August 20, 2026
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अशविंदर कौर की पुस्तक “सिंहासन बत्तीसी” लोकार्पित-पंजाबी विकिमीडियनज़ समूह ने किया समागम आयोजित

अशविंदर कौर की पुस्तक "सिंहासन बत्तीसी" लोकार्पित-पंजाबी विकिमीडियनज़ समूह ने किया समागम आयोजित

पटियाला- लेखिका अशविंदर कौर की ओर से सरल पंजाबी में रूपांतरित राजा विक्रमादित्य के जीवन और पराक्रम से संबंधित 32 लोक कथाओं के संग्रह ‘सिंहासन बत्तीसी’ का लोकार्पण किया गया। पंजाबी विकिमीडिया समूह की ओर से हाइकू हट्ट धौला में आयोजित इस लोकार्पण समारोह की अध्यक्षता पंजाब एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी, लुधियाना की डॉ. सुरजीत पातर चेयर की मुखी और प्रसिद्ध लेखिका डॉ. जगदीश कौर ने की, जबकि प्रख्यात लेखक एवं अनुवादक चरण गिल मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए।
पंजाबी विकिमीडिया ग्रुप के वालंटियर मीडिया इंचार्ज अमन अरोड़ा ने कार्यक्रम की जानकारी देते हुए बताया कि वरिष्ठ पंजाबी विकिमीडियनज़ नितेश और सतदीप गिल के नेतृत्व में आयोजित इस समारोह के दौरान विद्वानों ने पुस्तक के विभिन्न पहलुओं पर अपने विचार साझा किए। पुस्तक की लेखिका अशविंदर कौर ने बताया कि यह पुस्तक लाला जमीयत राय सुनामी द्वारा 1837 में लिखी गई पांडुलिपि का सरल पंजाबी रूपांतरण है। मध्यकालीन पंजाबी साहित्य में मौजूद ‘सिंहासन बत्तीसी’ की कहानियों की पांडुलिपियों की भाषा आम जनता की समझ से परे है, इसलिए उन्होंने इन कहानियों को समकालीन सरल पंजाबी में पुनर्जीवित करने के संकल्प के साथ इस पुस्तक का रूपांतरण किया। डॉ. जगदीश कौर ने कहा कि इस कार्य के साथ अशविंदर कौर ने एक ठोस, प्राचीन और विलुप्त होने के कगार पर पहुँच चुके साहित्य को पुनर्जीवित करके अस्तित्व में लाने का सफल प्रयास किया है। यह पुस्तक पंजाबी साहित्य और लोककथाओं की समृद्धि को दर्शाती है। चरण गिल ने कहा कि भले ही पहली नज़र में ये कहानियाँ मिथक, पराभौतिक और काल्पनिक काल्पनिक लगती हैं, लेकिन यह अंतर्मन में गहरी छाप छोड़ती हैं। इस पुस्तक के माध्यम से, इन कहानियों में निहित नैतिक मूल्य और उच्च आदर्श हमारी आने वाली पीढ़ियों में पुनः जागृत होंगे। नितेश, सतदीप गिल, पंजाबी विकिमीडिया समूह के कोआर्डीनेटर कुलदीप बुर्ज भलाईके और अमन अरोड़ा ने भी अपने विचार सांझा किए। समारोह में लाइब्रेरियन डॉ. लज्जू शर्मा, विकिमीडियन गुरमेल कौर, गुरतेज चौहान, सोनिया अटवाल, प्रो. प्रभजोत कौर गिल, तमनप्रीत कौर, सोनिया झम्मट, तुलसपाल कौर, सहजप्रीत कौर, तरनप्रीत गोस्वामी, हरमनजीत सिंह, गगनदीप कौर और अन्य साहित्य एवं भाषा प्रेमियों ने भाग लिया।

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