पटियाला– डॉ. अंबेडकर-शहीद भगत सिंह डेमोक्रेटिक इम्प्लॉइज एसोसिएशन के संयोजक अमन अरोड़ा ने कहा है कि सरकारी कर्मचारियों के अधिकारों की बात करना आम लोगों के हितों के खिलाफ खड़ा होना नहीं, बल्कि बेहतर प्रशासन और मजबूत अर्थव्यवस्था का समर्थन करना है। एक प्रेस बयान जारी करते हुए उन्होंने कहा कि कर्मचारियों के अधिकार और लोकहित एक-दूसरे के पूरक हैं और दोनों को आपसी टकराव के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
अमन अरोड़ा ने कहा कि पंजाब में सरकारी कर्मचारियों की मांगों को केवल वेतन और भत्तों का मुद्दा बताकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि यदि सरकार वित्तीय चुनौतियों का सामना कर रही है तो इसका समाधान किसी एक वर्ग की आय घटाने में नहीं, बल्कि राज्य के हर वर्ग की आय बढ़ाने में है।
उन्होंने कहा कि सरकारी कर्मचारियों को मिलने वाला वेतन बाजार में क्रय शक्ति पैदा करता है, जिससे व्यापार और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलता है। इसलिए किसी भी वर्ग की क्रय शक्ति में कमी का असर पूरी अर्थव्यवस्था पर पड़ता है।
अरोड़ा ने कहा कि महंगाई भत्ता कर्मचारियों के लिए कोई विशेष रियायत नहीं, बल्कि बढ़ती महंगाई के प्रभाव को कम करने का एक साधन है। उन्होंने कहा कि हर स्तर के सरकारी कर्मचारी और पेंशनभोगी के साथ समान व्यवहार किया जाना चाहिए तथा उनकी जायज मांगों का समाधान बातचीत के माध्यम से निकाला जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि पंजाब की आर्थिक मजबूती का रास्ता लोगों और कर्मचारियों को एक-दूसरे के सामने खड़ा करने में नहीं, बल्कि निवेश, रोजगार और आय के नए अवसर पैदा करने में है।
