पटियाला– अंतर्राष्ट्रीय बहावलपुर विरासत मंच की ओर से बहावलपुर की समृद्ध भाषाई, साहित्यिक और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण, इसके दस्तावेजीकरण और इसे नई पीढ़ी तक पहुंचाने के उद्देश्य से एक विशेष सेमिनार आयोजित किया जा रहा है। “बहावलपुरी भाषा, साहित्य और संस्कृति: विरासत, वर्तमान और भविष्य” विषय पर आधारित यह सेमिनार कल दिनांक 24 अक्टूबर को दोपहर बाद तीन बजे भाषा भवन के सेमिनार हॉल में होगा।
इस बारे में जानकारी साझा करते हुए मंच के संयोजक सुरिंदर कुमार तनेजा ने बताया कि यह आयोजन बहावलपुरी भाषा और संस्कृति की जड़ों को मजबूत करने का एक प्रयास है। सेमिनार के दौरान भाषा विभाग पंजाब के पूर्व निदेशक, प्रसिद्ध लेखक और बहावलपुर समाज की अजीम शख्सियत डॉ. मदन लाल हसीजा मुख्य वक्ता के रूप में शिरकत करेंगे और विषय पर अपना मुख्य भाषण प्रस्तुत करेंगे। डॉ. हसीजा बहावलपुरी भाषाई और सांस्कृतिक विरासत के ऐतिहासिक, साहित्यिक पहलुओं पर प्रकाश डालने के साथ-साथ वर्तमान में दरपेश चुनौतियों की बात करेंगे। प्रसिद्ध भाषा माहिर चरण गिल डिजिटल युग में बहावलपुरी भाषा को इंटरनेट के अनुकूल बनाने के बारे में बात करेंगे। इसके अलावा आयोजन में बहावलपुर समाज के अन्य नामचीन विद्वान, भाषा विशेषज्ञ, बुद्धिजीवी और साहित्यकार भी विशेष रूप से अपने विचार साझा करेंगे। वक्ता बहावलपुरी बोली के वर्तमान स्वरूप, इसके समृद्ध इतिहास और भविष्य की सामाजिक व साहित्यिक चुनौतियों पर गंभीर चर्चा करेंगे। इस दौरान यह भी विचारा जाएगा कि विलुप्त हो रही भाषाई और सांस्कृतिक परंपराओं को किस प्रकार नई पीढ़ी तक पहुंचाया जाए।
सुरिंदर कुमार तनेजा और अंतर्राष्ट्रीय बहावलपुर विरासत मंच की पूरी टीम ने समस्त बहावलपुरी समुदाय, लेखकों, शोधकर्ताओं, बुद्धिजीवियों और संस्कृति प्रेमियों को आज के इस ऐतिहासिक सेमिनार में बढ़-चढ़कर भाग लेने का निमंत्रण दिया है।
